Sunday, 20 September 2015

संतरा-Orange

 
परिचय : भारत में नागपुर व झालावाड़ में बड़े पैमाने पर संतरे की खेती होती है। संतरा ठंडा, शक्तिवर्द्धक, अम्ल, मीठा, स्वादिष्ट, खट्टा-मीठा, मूत्रल (पेशाब का बार-बार), क्षुधावर्द्धक (भूख का बढ़ना) है। गर्मी में इसकी खपत सबसे ज्यादा होती है। संतरा लोकप्रिय फल है। संतरे के अंदर विटामिन `ए´, `बी´ और `सी´ तथा कैल्शियम से भरा होता है। यह पाचन में अत्यंत लाभकारी होता हैं। संतरा खून को साफ करता है। संतरे के रस या इससे बनाया गया मार्मेलेड ज्यादा पौष्टिक है। संतरा तन और मन को प्रसन्नता देने वाला फल है। व्रत
और सभी रोगों में संतरा खाया जा सकता है। जिस व्यक्ति की पाचन-शक्ति (भोजन पचाने की क्रिया) खराब हो उनको संतरे का रस 3 गुने पानी में मिलाकर देना चाहिए। संतरा सुबह खाली पेट या खाना खाने के 5 घंटे बाद सेवन करने से सबसे ज्यादा लाभ करता है। एक व्यक्ति को एक बार में 1 या 2 संतरे का सेवन ही उपयुक्त है। संतरे में विटामिन `सी´ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। एक व्यक्ति को जितने विटामिन `सी´ की आवश्यकता होती है वह एक संतरा रोजाना खाने से पूरी हो जाती है।
 

 
गुण :
  1. संतरे में विटामिन `सी´ व `डी´ का अद्भुत मिश्रण होता है। यह पेड़ पर ही धूप एवं हवा के संयोग से पक जाता है। संतरा रोग निरोधक शक्ति को बढ़ाता है। इसमें ग्लूकोज व डेक्सटोल 2 ऐसे तत्त्व होते हैं, जो जीवनदायिनी शक्ति से परिपूर्ण होते हैं। इसलिए संतरा न केवल रोगी के शरीर में ताजगी लाता है बल्कि अनेक रोगों के लिए लाभदायक भी होता है।
  2. संतरे के रस में घुलनशील ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, सूक्रोज कार्बनिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें विटामिन `सी´, विटामिन `बी´ कॉम्लेक्स, विटामिन `ए´, खनिज तत्त्व, कुछ मात्रा में पौष्टिक पदार्थ एवं अन्य पोषक तत्त्व होने के कारण इसकी गणना पौष्टिक भोजन के रूप में की जाती है। बुखार के रोगी को संतरे का रस देने से शांति और ताकत मिलती है। मुंह सूखने व प्यास लगने की शिकायत दूर होती है। शरीर में खुश्की नहीं बढ़ पाती है। इसके रस को दिन में बार-बार भी पी सकते हैं।
  3. खून साफ करने के लिए व्रत में इसके रसाहार पर अनेक प्रयोग किए गए हैं। इसे शरीर शोधक व लगातार भोजन में जगह देने योग्य बताया गया है।
  4. संतरे में 23 स्वास्थ्यवर्द्धक गुण पाये जाते हैं। यूरोपवासी इसे बहुत उपयोगी मानकर इसे गोल्डन एप्पल के नाम से संबोधित करते हैं।
  5. गर्भवती औरतों को चाहिए कि वे गर्भावस्था के समय रोजाना 1 गिलास संतरे का रस पियें इससे संतान गोरे रंग की उत्पन्न होती है। इसके साथ ही यह गर्भवती की उल्टी को रोकने में सहायता करता है।
  6. रोगी के लिए संतरे का रस पानी, दवा और आहार का काम करता है। यह पेट की बढ़ती गर्मी को रोकता है और मुंह के स्वाद को सुधारता है।
संतरे में पाये जाने वाले तत्व-
 
तत्व मात्रा
प्रोटीन 0.9 प्रतिशत
वसा 0.3 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट 10.6 प्रतिशत
सल्फर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
तांबा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
लौह लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पोटैशियम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
मैग्नेशियम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
सोडियम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
क्लोरीन लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`ए´ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`बी´ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`सी´ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पानी 87.8 प्रतिशत
कैल्शियम 0.05 प्रतिशत
फॉस्फोरस 0.02 प्रतिशत


औषधीय उपयोग :
 
 
 
चेचक के दाग : संतरे के छिलकों को सुखा कर पीस लें। 4 चम्मच गुलाबजल को मिलाकर लेप बनाकर रोजाना चेहरे पर मलने से चेचक के दाग हल्के हो जाते है।
 


लम्बी उम्र के लिये : 1 गिलास संतरे का रस रोजाना पीने से मनुष्य की उम्र लम्बी होती हैं।



खून की कमी : संतरे का रस रोजाना सेवन करने से खून की कमी, पायरिया, आंखों की जलन, त्वचा के रोग, हाथ-पैर की जलन आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।



अपच : अपच के रोगियों को चाहिए कि वह संतरे के रस को गर्म करके उसमें काला नमक ओर सोंठ का चूर्ण पीसकर मिला लें। आमाशय के रोग में यह पेय रामबाण का काम करता है।



मधुमेह : 
  1. मधुमेह के रोगियों को संतरा दिया जा सकता है। मानसिक तनाव, हाईब्लडप्रेशर, गर्मी के रोग, अजीर्ण (भूख न लगना), कोष्ठबद्धता (कब्ज) आदि में इसका रस बहुत उपयोगी एवं प्रभावी है।
  2. संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें। फिर इस 4 चम्मच चूर्ण को 1 गिलास पानी में उबालकर छान लें और रोजाना पीयें। इससे मधुमेह (डायबिटीज) रोग में लाभ मिलता है।
 
बच्चों के रोग : छोटे बच्चों को संतरे का रस पिलाने से उनका शरीर मजबूत और खून साफ होता है। हडि्डयां मजबूत होती हैं तथा त्वचा निरोग रहती है। पूरे मौसम में यदि संतरे का रस पिलाया जाए तो बच्चे का शारीरिक विकास अच्छा होता है।



पायरिया : 
  1. संतरे के रस को गाय के दूध के साथ सेवन करने से पायरिया रोग, पाचनशक्ति कमजोर होना, कमजोरी, नींद न आना, पुरानी खांसी, आंखों के रोग, उल्टी, पथरी, जिगर के रोगों में बहुत ही लाभ होता है। संतरे में दिल के रोग, वात विकार और पेट के रोगों को दूर करने की अदभुत क्षमता है।
  2. रोजाना संतरा खाने से पायरिया रोग में लाभ होता है। संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें और उससे रोज मंजन करें। इससे दान्तों का पायरिया रोग दूर हो जाता है और दांत भी मजबूत होते हैं।

साबूदाना

साबूदाना एक खाद्य पदार्थ है। यह छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं। यह सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है। ये मूलरूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है। पकने के बाद यह अपादर्शी से हल्का पारदर्शी, नर्म और स्पंजी हो जाता है।
भारत में इसका उपयोग अधिकतर पापड़, खीर और खिचड़ी बनाने में होता है। सूप और अन्य चीज़ों को गाढ़ा करने के लिये भी इसका उपयोग होता है।
 
भारत में साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले तमिलनाडु के सेलम में हुआ था। लगभग १९४३-४४ में भारत में इसका उत्पादन एक कुटीर उद्योग के रूप में हुआ था। इसमें पहले टैपियाका की जड़ों को मसल कर उसके दूध को छानकर उसे जमने देते थे। फिर उसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर सेंक लेते थे।
 
टैपियाका के उत्पादन में भारत अग्रिम देशों में है। लगभग 700 इकाइयाँ सेलम में स्थित हैं। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की प्रमुखता होती है और इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियमविटामिन सी भी होता है।
 
साबूदाना की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं, उनके बनाने की गुणवत्ता अलग होने पर उनके नाम बदल और गुण बदल जाते हैं। अन्यथा ये एक ही प्रकार का होता है, आरारोट भी इसी का एक उत्पाद है।

 
उपयोगी जानकारी
 
साबूदाना किसी पेड़ पर नहीं ऊगता। यह कासावा या टैपियोका नामक कन्द से बनाया जाता है, कासावा वैसे तो दक्षिण अमेरिकी पौधा है, लेकिन अब भारत में यह तमिलनाडु,केरल, आन्ध्रप्रदेश और कर्नाटक में भी उगाया जाता है। केरल में इस पौधे को “कप्पा” कहा जाता है। इसकी जड़ को काट कर इसे बनाया जाता है, जो शकरकंदी की तरह होती है। इस कन्द में भरपूर स्टार्च होता है। यह सच है कि साबूदाना (Tapioca) कसावा के गूदे से बनाया जाता है, परंतु इसकी निर्माण विधि इतनी अपवित्र है कि इसे शाकाहार एवं स्वास्थ्यप्रद नहीं कहा जा सकता।
साबूदाना बनाने के लिए सबसे पहले कसावा को खुले मैदान में बनी बडी बडी कुण्डियों में डाला जाता है तथा पानी डाल कर रखा जाता है और रसायनों की सहायता से उन्हें लम्बे समय तक गलाया, सड़ाया जाता है। इस प्रकार सड़ने से तैयार हुआ गूदा महीनों तक खुले आसमान के नीचे पड़ा रहता है। रात में कुण्डियों को गर्मी देने के लिए उनके आस-पास बड़े-बड़े बल्ब जलाये जाते हैं। इससे बल्ब के आस-पास उड़ने वाले कई छोटे मोटे जहरीले जीव भी इन कुण्डियों में गिर कर मर जाते हैं।
 
दूसरी ओर इस गूदे में पानी डाला जाता है, जिससे उसमें सफेद रंग के करोड़ों लम्बे कृमि पैदा हो जाते हैं। इसके बाद इस गूदे को मजदूरों के पैरों तले रौंदा जाता है या आज कल कई जगह मशीनों से भी मसला जाता है। इस प्रक्रिया में गूदे में गिरे हुए कीट पतंग तथा सफेद कृमि भी उसी में समा जाते हैं। यह प्रक्रिया कई बार दोहरायी जाती है। और फिर उनमें से प्राप्त स्टार्च को धूप में सुखाया जाता है। जब यह पदार्थ लेईनुमा हो जाता है तो मशीनों की सहायता से इसे छन्नियों पर डालकर गोलियाँ बनाई जाती हैं, ठीक उसी तरह जैसे की बून्दी छानी जाती है।
 

इन गोलियों को फिर नारियल का तेल लगी कढ़ाही में भूना जाता है और अंत में गर्म हवा से सुखाया जाता है। और मोती जैसे चमकीले दाने बनाकर साबूदाने का नाम रूप दिया जाता है, बस साबूदाना तैयार। फिर इन्हें आकार, चमक, सफेदी के आधार पर अलग-अलग छाँट लिया जाता है और बाज़ार में पहुंचा दिया जाता है।

Friday, 18 September 2015

हींग

परिचय :

हींग का उपयोग आमतौर पर दाल-सब्जी में डालने के लिए किया जाता है इसलिए इसे `बघारनी´ के नाम से भी जाना जाता है। हींग फेरूला फोइटिस नामक पौधे का चिकना रस है। इसका पौधा 60 से 90 सेमी तक ऊंचा होता है। ये पौधे-ईरान, अफगानिस्तान, तुर्किस्तान, ब्लूचिस्तान, काबुल और खुरासन के पहाड़ी इलाकों में अधिक होते हैं। हींग के पत्तों और छाल में हलकी चोट देने से दूध निकलता है और वहीं दूध पेड़ पर सूखकर गोंद बनता हैं उसे निकालकर पत्तों या खाल में भरकर सुखा लिया जाता है। सूखने के बाद वह हींग के नाम से जाना जाता है। मगर वैद्य लोग जो हींग उपयोग में लाते हैं। वह हीरा हींग होती है और यही सबसे अच्छी होती है।
हमारे देश में इसकी बड़ी खपत है। हींग बहुत से रोगों को खत्म करती है। वैद्यों का कहना है कि हींग को उपयोग लाने से पहले उसे सेंक लेना चाहिए। चार प्रकार के हींग बाजारों में पाये जाते हैं जैसे कन्धारी हींग, यूरोपीय वाणिज्य का हींग, भारतवर्षीय हींग, वापिंड़ हींग।
रंग : हींग का रंग सफेद, हल्का गुलाबी और पीला, व सुरखी मायल जैसा होता है।
स्वाद : इसका स्वाद खाने में कडुवा और गन्ध से भरा होता है।
स्वभाव : हींग गर्म और खुश्क होती है।
हानिकारक : यह गर्म दिमाग और गर्म मिजाज वालों को हानि पहुंचा सकती है।
दोषों को दूर करने वाला : कतीरा और बनफ्सा हींग में व्याप्त दोषों को दूर करते हैं।
तुलना : हींग की तुलना सिकंजीव से कर सकते हैं।
मात्रा : सवा दो ग्राम।
गुण :

हींग पुट्ठे और दिमाग की बीमारियों को खत्म करती है जैसे मिर्गी, फालिज, लकवा आदि। हींग <आंखों की बीमारियों में फायदा पहुंचाती है। खाने को हजम करती है, भूख को भी बढ़ा देती है। गरमी पैदा करती है और आवाज को साफ करती हैं। हींग का लेप घी या तेल के साथ चोट और बाई पर करने से लाभ मिलता है तथा हींग को कान में डालने से कान में आवाज़ का गूंजना और बहरापन दूर होता है। हींग जहर को भी खत्म करती है। हवा से लगने वाली बीमारियों को भी हींग मिटाती है। हींग हलकी, गर्म और और पाचक है। यह कफ तथा वात को खत्म करती है। हींग हलकी तेज और रुचि बढ़ाने वाली है। हींग श्वास की बीमारी और खांसी का नाश करती है। इसलिए हींग एक गुणकारी औषधि है।

शहद अमृत है! (Honey is nectar!)

शहद अमृत है, लेकिन इन चीजों के साथ खाएंगे तो ये जहर बन जाएगा


शहद को आयुर्वेद में अमृत माना गया है। माना जाता है कि रोजाना सही ढंग से शहद लेना सेहत के लिए अच्छा होता है। लेकिन शहद का सेवन करने के फायदे ही नहीं नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए शहद का सेवन जब भी करें नीचे लिखी बातों को जरूर ध्यान रखें।
  1. चाय, कॉफी में शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए। शहद का इनके साथ सेवन विष के समान काम करता है।
  2. अमरूद, गन्ना, अंगूर, खट्टे फलों के साथ शहद अमृत है।
  3. शरीर के लिये आवश्यक, लौह, गन्धक, मैगनीज, पोटेशियम आदि खनिज द्रव शहद में होते हैं।
  4. शहद के एक बड़ा चम्मच में 75 ग्राम कैलोरी शक्ति होती है।
  5. किसी कारणवश आप को शहद सूट नहीं किया तो या खाकर किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो नींबू का सेवन करें।
  6. इसे आग पर कमी न तपायें।
  7. मांस, मछली के साथ शहद का सेवन जहर के समान है।
  8. शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानिकारक है।
  9. बाजरू चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत में विष मिलाने के समान है।
  10. शहद सर्दियों में गुनगुने दूध या पानी में लेना चाहिये।
  11. एक साथ अधिक मात्रा में शहद न लें। ऐसा करना नुकसानदायक होता है। शहद दिन में दो या तीन बार एक चम्मच लें।
  12. घी, तेल, मक्खन में शहद विष के समान है।
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शहद के फायदे और नुकसान
आयुर्वेद में ऐसी मान्यता है कि अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले छत्तों के शहद के गुण वृक्षों के आधार पर होते हैं। जैसे नीम पर लगे शहद का उपयोग आँखों के लिए, जामुन का मधुमेह, सहजने का हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए बेहतर होता है। इसके अलावा भी शहद का सेवन कई रोगों में उपयोगी है।
  • * अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खाँसी में आराम मिलता है।
  • * पके आम के रस में शहद मिलाकर देने से पीलिया में लाभ होता है।
  • * जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
  • * उल्टी (वमन) के समय पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग लाभकारी रहता है।
शहद से नुकसान : अधिक गर्म पानी, गर्म दूध, अधिक धूप में बच्चों को शहद का प्रयोग हानिकारक साबित होता है। साथ ही घी की समान मात्रा प्रयोग करने पर यह विष की भाँति कार्य करने लगता है। इसलिए इन स्थितियों में इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

शहद में छिपा है सेहत का खजाना
 
नई दिल्ली: आयुर्वेद में शहद को एक खाद्य एवं प्राकृतिक औषधि के रूप में निरूपित किया गया है और शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाये रखने के लिये इसे अमृत भी कहा गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, परन्तु सर्दियों में तो शहद का प्रयोग विशेष लाभकारी होता है।
 
नियमित रूप से शहद का सेवन करने से शरीर को स्फूर्ति, शक्ति और ऊर्जा मिलती है। शहद से शरीर स्वस्थ, सुंदर और सुडौल बनता हैं। शहद मोटापा घटाता भी है और शहद मोटापा बढ़ाता भी है। मीठे शहद के गुणों से रोगी व्यक्ति स्वस्थ हो सकता है।
 
शहद औषधीय गुणों की वजह से अनेक बीमारियों में उपयोग होता रहा है। शहद का प्रयोग जहां आंखों की रोशनी बढ़ाने तथा कफ एवं अस्थमा और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर सिद्ध हुआ है, वहीं रक्त शुद्धि तथा दिल को मजबूत करने में भी सहायक है, तो पेश है कुछ टिप्स कि शहद को किन-किन बीमारियों में तथा किन द्रव्यों के साथ अनुपात निर्धारण से हम इसका लाभ उठा सकते हैं।
 
शहद, गाजर के जूस के साथ लेने से आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है। इसे खाना खाने से एक घंटा पहले लेना चाहिये। शहद के औषधीय गुणों के कारण अनेक बीमरियों से छुटाकरा पाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। शहद को खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों को भी शहद से दूर किया जा सकता है।
 
कब्ज को दूर करने के लिए भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है। टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर प्रतिदिन लेने से कब्ज की शिकायत दूर होने लगती है।
 
शहद को पानी में मिलाकर कुल्ले करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। दांत के दर्द को दूर करने में भी शहद मदद करता है। रूई के फाहे को शहद में भिगोकर दर्द वाली जगह पर रखें। चेहरे को झुरिंयां से बचाने के लिए शहद में कच्ची हल्दी पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर लगाने से झुरिंयां दूर हो जाएंगी। गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने से मोटापा कम होता है व दूध में शहद डालकर पीने से दुबलापन मिटता है।
 
गुनगुने दूध में रोजाना एक चम्मच शहद डालकर खाने से शरीर में हमेशा स्फूर्ति बनी रहती है।

शहद के आठ प्रयोग: ये करेंगे जादू सा असर
 
शहद को आयुर्वेद में औषधीय गुणों का खजाना माना गया है। शहद का अलग-अलग तरह से उपयोग कर हम हमारे शरीर की कई सारी समस्याओं को दूर भगा सकते हैं। शहद में यह गुण होता भी है कि इसका अलग-अलग वस्तुओं के साथ उपयोग करने पर इसकी तासीर भी भिन्न हो जाती है।
आइए जानते हैं शहद के ऐसे ही कुछ गुणों को....
  1. शहद को मसूड़ों पर मलने से पायरिया नहीं होता।
  2. छोटे बच्चों को दूध पिलाने से पहले शहद चटा दें। फिर दूध पिलाएं ये रोग निरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  3. बेसन, मलाई में शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें, चेहरा चमक उठेगा ।
  4. प्रतिदिन 25 ग्राम शहद दूध के साथ जरूर लें। इससे शरीर को ताकत मिलती है।
  5. त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा।
  6. रात को सोने से पहले दूध के साथ शहद लेने पर बहुत अच्छी नींद आती है।
  7. दूध में शक्कर की जगह शहद लेने से गैस नहीं बनती और पेट के कीड़े भी निकल जाते हैं।
  8. जुकाम होने पर शहद की भाप लें व उसी पानी से कुल्ला करें।

मीठे शहद के गुणकारी नुस्खे
 
कई बार हम साधारण सी बीमारी में भी घबरा जाते हैं, लेकिन अगर हमें थोड़ा भी घरेलू नुस्खों के बारे में पता हो तो आसानी से तुरंत इलाज किया जा सकता है। दादी-नानी के खजाने से हम लेकर आए हैं ऐसे ही कुछ खास लाजवाब सरल-सहज नुस्खे, जिन्हें अपना कर आप भी पा सकते हैं निरोगी काया :-

  1. * अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
  2. * पके आम के रस में शहद मिलाकर देने से पीलिया में लाभ होता है।
  3. * जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
  4. * उल्टी (वमन) के समय पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग लाभकारी रहता है।
  5. * शुष्क त्वचा पर शहद, दूध की क्रीम व बेसन मिलाकर उबटन करें। इससे त्वचा की शुष्कता दूर होकर लावण्यता प्राप्त होगी। 
  6. * एक गिलास दूध में बिना शकर डाले शहद घोलकर रात को पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर सुडौल, पुष्ट व बलशाली बनता है। 
  7. * शहद नित्य सेवन निर्बल आमाशय व आंतों को बल प्रदान करता है। 
  8. * प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
  9. * हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है। 
  10. * पेट के छोटे-मोटे घाव और शुरुआती स्थिति का अल्सर शहद को दूध या चाय के साथ लेने से ठीक हो सकता है। 
  11. * सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है। 
  12. * शहद से मांसपेशियां बलवती होती हैं। 
  13. * बढ़े हुए रक्तचाप में शहद का सेवन लहसुन के साथ करना लाभप्रद होता है। 
  14. * अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं। 
  15. * संतरों के छिलकों का चूर्ण बनाकर दो चम्मच शहद उसमें फेंटकर उबटन तैयार कर त्वचा पर मलें। इससे त्वचा निखर जाती है और कांतिवान बनती है। 
  16. * कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।

खीरा है गुणों की खान

खीरा खाओ और वजन खटाओ

पानी का स्रोत माना जाने वाला खीरा अधिकतर कई लोगों को नहीं अच्‍छा लगता है। पर क्‍या आपको पता है कि इसको कई बॉलीवुड स्‍टार अपने आपको स्‍लिम-ट्रिम बनाएं रखने के लिए खाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि खीरा खा कर वजन कैसे कम होता है तो हमारा यह लेख जरुर पढ़ें।

फायदे-खीरे में 95% पानी और 5% फाइबर पाया जाता है। इसलिए यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ ही पाचन क्रिया को भी सही रखता है तथा नमक को भी बैलेंस करता है। साथ ही खीरे से शरीर में ठंडक रहती है और यह आंखों तथा त्‍वचा को भी साफ करता है।

डाइट-अगर आपको खीरे को अपनी डाइट में शामिल करना है तो इसका सलाद तैयार करें जिसमें 2 खीरे काटें और उसमें नमक, ऑलिव आयल तथा कुछ पत्‍तेदार सब्‍जियां भी मिला लें। यह खाने से आपका पेट कम होगा और पेट भर भी जाएगा।

कुछ हर्ब जैसे, धनिया, में विटामिन ए और आयरन, कॉपर और मैगनीश्यिम जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसलिए इनको अपने सलाद में जरुर शामिल करें जिससे आपकी बॉडी को पोषण मिल सके।

1. ब्रेकफास्‍ट में खाएं-
गेहूं की ब्रैड और जैम
1 कटोरा खीरे का सलाद
1 गरम कप चाय

2. लंच-दाल, रोटी, सब्‍‍जी और खीरे का सलाद।

3. डिनर-डिनर में आपको केवल सलाद ही खाना चाहिये।

अगर आप खीरे से तैयार सलाद बना कर खाएगें तो 3 दिन में लगभग 2 किलो वजन तो कम ही हो जाएगा। इसके अलावा यह हमारी त्‍वचा का भी खास ख्‍याल रखता है।

खीरा है गुणों की खान
 
नयी दिल्ली, 7 मई (वार्ता)। गर्मी के मौसम में सहजता से किफायती दाम पर उपलब्ध खीरा न सिर्फ गर्मी से राहत देता है बल्कि यह पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से कई बीमारियों में भी लाभदायक होता है।
 
पोषाहार विशेषज्ञ एवं डायटिशियन संगीता राज ने बताया कि खीरा में 96 प्रतिशत जल की मात्रा होती है जो किसी भी कंपनी के बोतलबंद पानी से बेहतर और प्राकृतिक रूप से डिस्टिल्ड होता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग खीरे का छिलका हटाकर खाना पंसद करते लेकिन इसे कभी भी बिना छिलके के नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके छिलके में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
 
उन्होंने बताया कि खीरा में अल्कालिन फर्मोगि मिनरल होता है और यह एंटी आक्सीडेंट का काम करने वाले विटामिन ए एवं सी, फ्लोट, मैगनीज, मोलीबडीन्म, पोटाशियम, सिलिका और सल्फर जहां प्रचुर मात्रा पाये जाते हैं वहीं विटामिन बी कांप्लेक्स, सोडियम, कैल्सियम, फास्फोरस और क्लोरिन भी पाये जाते हैं।
 
उन्होंने बताया कि खीरा में मिनरलों की मात्रा अधिक होने की वजह से अब इसका उपयोग हबर्ल फेश क्रीम और फेश वाश बनाने में किया जाने लगा है। उन्होंने बताया कि खीरा में इतना कुछ होने के बावजूद यह कम कैलोरी वाला खाद्य पदार्थ है। एक सौ ग्राम खीरा में मात्र 54 कैलोरी ऊर्जा होता है।
 
उन्होंने बताया कि खीरा में पाये जाने वाले मिनरल अपच एवं एसिडिटी में भी लाभदायक होते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही यह गैस्ट्रिक और ड्यूडीनल अल्सर के मरीजों के लिए भी दवा का काम करता है1 खीरा रक्तचाप को नियंत्रित करने तथा उसे सुचारू रूप से संचालित करने में भी मददगार है।
 
उन्होंने बताया कि खीरा में सिलिका नामक रासायनिक तत्व पाया जाता है जो शरीर के उत्तकों को जोडऩे में मददगार होता है। खीरा का जूस शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के रास्ते बाहर निकालता है और किडनी में यदि पत्थर हो तो उसे ङ्क्षपघलाने में भी सहायक होता है। खीरा के जूस का सेवन बुखार के दौरान भी किया जा सकता है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में बहुत कारगर होता है।
 
खीरा यूरिक एसिड को कम करता है जिससे शरीर के विभिन्न स्थानों विशेषकर जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करता है। इसका सेवन बाल वृद्धि के लिए भी लाभदायक है1 इसके अतिरिक्त यह हर तरह से त्वचा की देखभाल में भी बहुत मददगार होता है क्योंकि इसमें पाये जाना वाला विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट त्वचा को निखारता है।
 
गुणों की खान है खीरा 
 
खीरा भारतीय भोजन का अभिन्न अंग है। सच कहा जाए तो यह गुणों की खान है। खीरा न केवल भूख मिटाने बल्कि पोषण व इंस्टैंट एनर्जी देने, फैट कम करने, सरदर्द भगाने और मुंह की दुर्गंध दूर करने में काम आता है। यह डायबीटीज, किडनी, लीवर और मूत्राशय संबंधी बीमारियों में लाभदायक होता है।
 
खीरा में विटामिन बी, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6, सी, फोलिक एसिड, कैल्शियम, आयरन, मैगनीशियम, फासफोरस, मिनरल और जिंक होता है। विटामिन ´ए´ और ´सी´ अधिक मात्रा में पाया जाता है। खीरा में 97 प्रतिशत तक पानी होता है और इसे खाने से भूख भी शांत होती है। यह मधुमेह के रोगियों और स्थूल शरीर वालों के लिए बहुत लाभकारी है।
 
इसका प्रयोग खास तौर पर सलाद के रूप में किया जाता है। यह पेशाब लाने वाला और मूत्र रोगों को दूर करने वाला होता है। खीरा ठंडा होता है और गर्मी के मौसम में इसे खाने से प्यास शांत होती है। खीरा को लैटिन में क्युकूमिस सैटाइवस कहते हैं। खीरा सफेद, पीला और हरा होता है।
 
आयुर्वेद के अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करने वाला रक्त विकार नाशक है।
 
औषधीय लाभ
 
यह कब्ज दूर करता है। पीलिया, ज्वर, प्यास, शरीर की जलन, त्वचा रोग, छाती में जलन, अजीर्ण व एसीडीटी में फायदेमंद है।
 
मोटापे से परेशान लोग सलाद के रूप में इसका प्रयोग करें तो लाभ होता है। इससे गुर्दे की समस्या दूर हो सकती है।
 
खीरा का सेवन करने से भूख बढती है।
 
खीरे के टुकड़े आँखों पर रखने से आँखों के नीचे का कालापन दूर होता है। खीरे के रस में नीबू-मलाई मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग निखरता है।
 
खीरे में मौजूद फाइटो केमिकल्स हमारी स्किन को टाइट रखने में मदद करते हैं और झुर्रियों को बाय-बाय कहने में मदद करते हैं। स्विमिंग करने से पहले या बाद में अपने प्रॉब्लम एरिया पर इसके कुछ टुकड़े मलने से वजन तेजी से घटता है।
 
खीरा से थकान कम होती है, सिंक या स्टेनलेस स्टील के बरसों पुराने दाग मिटाने, पेन का लिखा मिटाने और यहां तक कि जूते पॉलिश करने तक में इसका प्रयोग किया जाता है। 
 


खीरा खाने के फायदे


  1. खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है जो की प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है|
  2. खीरा खाने से बाल स्वस्थ रहतें हैं|
  3. खीरे का जूस दांत के कीड़ो को ठीक करने में सहायक होता है!
  4. खीरा खाने से पेशाब ना आना या रूक रूक कर आना की बिमारी ठीक हो जाती है और पेशाब खुलकर आता है|
  5. खीरा शुगर के मरीजों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है! इसलिए शुगर के मरीजों को खीरा जरुर खाना चाहिए|
  6. खीरा गुर्दे और मूत्राशय के रोगों को ठीक करने में बहुत सहायक होता है|
  7. खीरा लीवर की बीमारियों को होने से भी रोकता है!
  8. खीरा शरीर के अग्नाशय को भी स्वस्थ रखता है!
  9. खीरा ब्लड प्रेशर को सन्तुलित रखता है!
  10. खीरा शरीर की गर्मी को शांत करता है| गर्मियों में यह फायदेमंद होता है| वैसे खीरा गर्मियों के मौसम में ही पैदा है|
  11. खीरा शरीर की त्वचा को स्वस्थ बनाता है| इसके साथ साथ यह आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है|
  12. गर्मियों में हमें रोजाना खीरा खाना चाहिए इससे हम गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं।

Thursday, 17 September 2015

केसर

परिचय :

केसर की खेती भारत के कश्मीर की घाटी में अधिक की जाती है। यहां की केसर हल्की, पतली, लाल रंग वाली, कमल की तरह सुन्दर गंधयुक्त होती है। असली केसर बहुत महंगी होती है। कश्मीरी मोंगरा सर्वोतम मानी गई है। विदेशों में भी इसकी पैदावार बहुत होती है और भारत में इसकी आयात होती है।
केसर का पौधा बहुवर्षीय होता है और यह 15 से 25 सेमी ऊंचा होता है। इसमें घास की तरह लंबे, पतले व नोकदार पत्ते निकलते हैं। इसमें बैगनी रंग की अकेले या 2 से 3 की संख्या में फूल निकलते हैं। एक फूल से केसर के तीन तन्तु प्राप्त होती है। इसके बीज आयताकार, तीन कोणों वाले होते हैं जिनमें से गोलकार मींगी निकलती है।
आयुर्वेद के अनुसार : आयुर्वेदों के अनुसार केसर उत्तेजक होती है और कामशक्ति को बढ़ाती है। यह मूत्राशय, तिल्ली, यकृत (लीवर), मस्तिष्क व नेत्रों की तकलीफों में भी लाभकारी होती है। प्रदाह को दूर करने का गुण भी इसमें पाया जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार : केसर की रासायनिक बनावट का विश्लेषण करने पर पता चला हैं कि इसमें तेल 1.37 प्रतिशत, आर्द्रता 12 प्रतिशत, पिक्रोसीन नामक तिक्त द्रव्य, शर्करा, मोम, प्रोटीन, भस्म और तीन रंग द्रव्य पाएं जाते हैं। अनेक खाद्य पदार्थो में केसर का उपयोग रंजन पदार्थ के रूप में किया जाता है।
असली केसर की पहचान : असली केसर पानी में पूरी तरह घुल जाती है। केसर को पानी में भिगोकर कपड़े पर रगडने से यदि पीला केसरिया रंग निकले तो उसे असली केसर समझना चाहिए और यदि पहले लाल रंग निकले व बाद में पीला पड़े तो नकली केसर समझना चाहिए।
केसर बुखार की प्रारिम्भक अवस्था, दाने, चेचक आन्त्रज्वर को बाहर निकालता है लेकिन दाने निकल आने पर विशेषत: बुखार आदि पित्त के लक्षणों में केसर का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।
विभिन्न भाषाओं में केसर के नाम :

हिन्दी केशर, केसर।
अंग्रेजी सैफ्राम।
संस्कृत कुंकुभ, घुसृण, रक्त काश्मीर।
मराठी केशर।
गुजराती केशर।
बंगाली कुकम।
तैलगी कुकुम पुवु।
फारसी करकीमास।
अरबी जाफरान।
लैटिन क्रोकस सेटाइवस।

खरबूजा(Facts about melon)

खरबूजे की सभी प्रजातियां सारी दुनिया में गर्मियों में ही होती हैं, चूंकि यह गर्मियों का फल है। अतः गर्मियों का मौसम जब तापमान 38 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच हो तब खाना लाभप्रद है।
 
100 ग्राम खरबूजे की मात्रा के आधार पर पाये जाने वाले तत्व :–
  1. प्रोर्टिन-0.3 ग्राम,
  2. कैल्शियम-32 मिग्रा.,             
  3. मैग्नेशियम-31 मिग्रा.,
  4. पोटेशियम-341 मिग्रा.,
  5. क्लोंरीन-14 मिग्रा.,
  6. सोडियम-104.6 मिग्रा.,
  7. सल्फर-32 मिग्रा.
खरबूजे का शरीर में क्षारीय प्रभाव होता है। अतः यह खून के PH व अन्य अंगों के द्रवों के च्भ् को बनाये रखता है। खरबूजे के साथ धारणा रही है कि यदि खरबूजा दोपहर में खाया जाए या इसके साथ पानी पीया जाए तो हैजा हो जाता है, ऐसा कदापि नहीं हैं। खरबूजा प्रोर्टिन व विटामिन्स वाला पदार्थ है। इसे दिन में कभी भी व कैसे भी खाया जा सकता है।
 
रोग नाशक :–
खरबूजा अधिक क्षारिय प्रभाव पैदा करने वाला फल है। अतः इस कारण यह कई रोगों का नाशक है। खरबूजे में पाये जाने वाला कैल्शियम पोटेशियम व सोडियम दूध पिलाने वाली मात्राओं में दूध की बढ़ोतरी करता है। खरबूजे का सल्फर व कैरोटिन रक्त कोशिकाओं को फैलाता है, फलस्वरूप रक्तचाप कम होता है। यदि उच्च रक्तचाप वाला व्यक्ति एक किग्रा से डेढ़ किग्रा तक खरबूजे का प्रतिदिन सेवन करता है तो कोशिकाओं का फैलाव व लचीलापन तेजी से बढ़ता है और रक्तचाप को सामान्य लाने में मदद करता है। खरबूजे में पानी की मात्रा 93 प्रतिशत होती है जो कि एक्लालाइन है। अतः इस कारण यह गुर्दे की पथरी, जिगर की बीमारी को ठीक करता है। खरबूजा मूत्रवर्धक होने के कारण यह पेशाब के माध्यम से शरीर से उन अनावश्यक तत्वों को बाहर कर देता है, जिनको कि शरीर को जरूरत नहीं है। यह शरीर के आन्तरिक अंगों की सफाई का सशक्त माध्यम है।
 
विशेष :–

प्रकृति ने प्रत्येक फल को उसके हिसाब से पूर्ण बनाकर भेजा है। खरबूजे को भी अपने तरीके से पूर्ण बनाया है। इसमें पाया जाने वाला ग्लूकोज उच्च क्लालिटी का होने के कारण शीघ्र ही पचता है। जब खरबूजे को किसी फल, शक्कर या दूध के साथ मिलाकर खाया जाता है जो खरबूजे की क्रियाशीलता को कम करता है। साफ–स्वच्छ, ठण्डा व पका हुआ फल उर्जा से भरपूर होता है। गर्मियों के मौसम में इसका भरपूर प्रयोग शीतलता व ताजगी देता है।

दस लाभ 
 
खरबूजा लंग कैंसर से हमारे शरीर की रक्षा करने में मदद कर सकता है। साथ ही, इसमें मौजूद विटामिन सी और बिटा-कैरोटेन मिलकर कैंसर रोकने में सहायक हो सकते हैं।
 
इसे गर्मी के मौसम का परफेक्ट फ्रूट माना गया है। इसमें मौजूद पानी की ज्यादा मात्रा शरीर में पानी की कमी की भरपाई करता है। इसी वजह से हमारा शरीर गर्मियों में पसीने के रूप में शरीर से निकले पानी के भरपाई तुरंत कर लेता है।
 
इस मौसम में खरबूजा शरीर की गर्मी और उससे जुड़े बीमारियों को रोक देता है। अगर आप नियमित रूप से अपने शरीर में मौजूद कैलोरी को जानने के आदी हैं तो रोज खरबूजे खाइए।
 
वजन कम करता है खरबूजा
 
वजन कम करने की इच्छा वालों के लिए खरबूजा बहुत अनुकूल फल है, क्योंकि इसमें काफी मात्रा कैलोरी या शुगर मौजूद होती है। इसलिए खरबूजे को काफी उम्दा फल समझना चाहिए।
 
इसके गूदे में मौजूद नारंगी रंग के रेशे या फाइबर काफी मुलायम होते हैं, जिन्हें कब्जियत की शिकायत रहती है, वे खरबूजा खाएं, तो इससे फायदा होता है।
 
खरबूजे में कई विटामिन
 
खरबूजे में उच्च स्तर का बेटाकैरोटेन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, विटामिन सी और ए मौजूद होते हैं। इसलिए अगर आप सेहतमंद और जवां दिखना चाहते हैं तो अपने दैनिक आहार में खरबूजे को शामिल करना मत भूलिएगा।
 
खरबूजे में मौजूद पोटैशियम शरीर से सोडियम को निकालने का काम करता है, जिससे हाई ब्लडप्रेशर को लो करने में मदद मिलती है।
 
पीरियड के दौरान महिलाओं को खरबूजा खाते रहना चाहिए, क्योंकि यह हेवी फ्लो और क्लॉट्स को कम कर देता है। थकान में भी यह राहत देता है। साथ ही, यह नींद ना आने की बीमारी को भी भगाता है।

आखों के लिए फायदेमंद
- आंखों के लिए विटामिन ए बहुत लाभदायक माना जाता है। खरबूजा इसीलिए आंखों के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि खरबूजा विटामिन बीटा-कारोटीन के रूप में विटामिन ए उपलब्ध कराता है। डब्ल्यूएचएफ के अनुसार रोज तीन बार उच्च बीटा-कारोटीन फल खाने से मैकुलर डीजेनेरेशन का खतरा 1.5 बार खाने वालों की तुलना में 36 प्रतिशत कम हो जाता है। मैकुलर डीजेनेरेशन ढलती उम्र के साथ होने वाली समस्या है, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
 
केंसर को पनपने से रोकता है
शरीर में उपस्थित कोशिकाएं जिनसे मिलकर हमारा पूरा शरीर बना है अगर किसी एक भी अंग में वे अनियंत्रित रूप से बढऩे लगती हैं तो कैंसर हो जाता है।कैंसर को एक खतरनाक बीमारी माना जाता है ये बीमारी अगर ज्यादा बढ़ जाए तो लाइलाज हो जाती है। इसीलिए इस बीमारी से बचे रहना जरुरी है और बचने के लिए कुछ बहुत ज्यादा करने की जरुरत नहीं है बस सिर्फ अपनी दिनचर्या व खानपान में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए तो कैंसर से हमेशा बचा रहा जा सकता है। खरबूजा एक ऐसा ही फल है इसमें बड़ी मात्रा में आर्गेनिक पिगमेंट केरोटेन्वाइड पाया जाता है, जो कैंसर से बचाने के साथ ही लंग कैंसर की संभावना को भी कम करता है। यह शरीर में पनप रहे कैंसर के मूल को नष्ट कर देता है।
 
डायबिटीज रोगियों के लिए भी स्वादिष्ट दवा
- डायबिटीज के रोगियों के लिए भी खरबूजा एक औषधि की तरह काम करता है। उनके आहार में शुगर और ऊर्जा की मात्रा कम होती है। ऐसे रोगी के लिए खरबूजे का जूस अच्छा आहार हो सकता है। विशेषज्ञ हमेशा मधुमेह के रोगी को खरबूजे का जूस लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।
 
वजन कम करना है तो खरबूजा खाएं
- अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो गर्मियों में खरबूजा जरूर खाएं। इसमें काफी कम मात्रा में सोडियम पाया जाता है। साथ ही यह फैट और कोलेस्ट्रोल से भी मुक्त होता है। वहीं इससे काफी कम कैलोरी मिलती है। एक कप खरबूजे में सिर्फ 48 कैलोरी ऊर्जा होती है। खरबूजे में पाए जाने वाले प्रकृतिक मीठेपन से आप उच्च कैलोरी वाली मिठाईयों से भी दूर रहेंगे।
 
निखर जाएगी त्वचा, रूखापन नहीं आएगा
- पुरानी खाज में खरबूजे का रस लाभदायक है।खरबूजे में विटामिन सी पाया जाता है।हमारी त्वचा में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाए जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। अगर आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो त्वचा के रुखेपन नहीं आएगा।
 
हार्टअटैक की संभावना पर ही कर डालाता है अटैक
- खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो रक्त कोशिओं को जमने से रोकता है। रक्त कोशिकाओं के जमने से ही दौरा और दिल की बीमारी होती है। खरबूजा शरीर में रक्त के बहाव को बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे दौरा और दिल की बीमारियों की संभावना कम हो जाती है। अधिकतर खरबूज में विटामिन बी पाया जाता है। विटामिन बी शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है। सूगर और कार्बोहाइड्रेट को संसाधित करने में यह ऊर्जा शरीर के लिए आवश्यक होती है।
 
कोई टाइम लिमिट नहीं, कभी भी खाइए
खरबूजे का शरीर में क्षारीय प्रभाव होता है, यह शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में सहायता करता है। खरबूजे के साथ धारणा रही है कि यदि खरबूजा दोपहर में खाया जाए या इसके साथ पानी पीया जाए तो हैजा हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। खरबूजा एक विटामिन्स व प्रोटिन से भरपूर फल है जिसे कभी भी खाया जा सकता है।
 
आलस भगाता है, ताजगी लाता है
खरबूजे में ग्लूकोज उच्च क्लालिटी का होने के कारण शीघ्र ही पचता है। जब खरबूजे को किसी फल, शक्कर या दूध के साथ मिलाकर खाया जाता है जो खरबूजे की क्रियाशीलता को कम करता है। साफ ,स्वच्छ, ठण्डा व पका हुआ फल उर्जा से भरपूर होता है। गर्मियों के मौसम में इसका भरपूर प्रयोग शीतलता व ताजगी देता है।
 
हाईब्लडप्रेशर में भी काम की चीज
हाईब्लडप्रेशर वाला व्यक्ति एक किग्रा से डेढ़ किग्रा तक खरबूजे का प्रतिदिन सेवन करता है तो कोशिकाओं का फैलाव व लचीलापन तेजी से बढ़ता है और रक्तचाप को सामान्य लाने में मदद करता है। खरबूजे में पानी की मात्रा 93 प्रतिशत होती है इसलिए खरबूजा पेशाब के माध्यम से शरीर से उन अनावश्यक तत्वों को बाहर कर देता है जिनको कि शरीर को जरूरत नहीं है। यह शरीर के आन्तरिक अंगों की सफाई का सशक्त माध्यम है। इसलिए इसका सेवन पथरी के रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता है।
 
मौसमी कीटाणुओं से होगी सुरक्षा
- खरबूजा गर्मियों में होने वाली कई बीमारियों को शरीर से दूर रखता है। इस कारण यह कई रोगों का नाशक है। खरबूजे में पाये जाने वाला कैल्शियम पोटेशियम व सोडियम दूध पिलाने वाली मात्राओं में दूध की बढ़ोतरी करता है। खरबूजे का सल्फर व कैरोटिन रक्त कोशिकाओं को फैलाता है,जिस कारण रक्तचाप कम होता है।
 
किडनी के रोगियों के लिए फायदेमंद
- खरबूजे किडनी के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। खरबूजा शरीर में डाइयुरेटिक क्षमता को बढ़ाता है। इस कारण इससे किडनी की बीमारियां ठीक होती हैं और यह एकजिमा को कम करता है। अगर खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।
 
तनाव भी दूर कर देता है
- अगर आप अक्सर तनाव में रहते हैं तो गर्मियों में खरबूजा खाना न भूलें। इसका मुख्य कारण यह है कि खरबूजे में भरपूर मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है। खरबूजे में मौजूद यही पोटेशियम इससे उबरने में सहायक होता है। पोटेशियम दिल को सामान्य रूप से धड़कने में मदद करता है, जिससे मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और यह सुचारू रूप से कार्य करता है।
 
चलो कब्ज भी भगा लो
- खरबूजे से कब्ज की समस्या भी दूर होती है। अगर आप पाचन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो खरबूजा खाइए। खरबूजे में मौजूद पानी की मात्रा पाचन में सहायक होती है। इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स पेट की एसिडिटी को खत्म करते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रहती है। खरबूजे के सेवन से पेट की जलन शांत होती है व यह शरीर की अम्लता को दूर करता है।