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Friday, 18 September 2015

शहद अमृत है! (Honey is nectar!)

शहद अमृत है, लेकिन इन चीजों के साथ खाएंगे तो ये जहर बन जाएगा


शहद को आयुर्वेद में अमृत माना गया है। माना जाता है कि रोजाना सही ढंग से शहद लेना सेहत के लिए अच्छा होता है। लेकिन शहद का सेवन करने के फायदे ही नहीं नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए शहद का सेवन जब भी करें नीचे लिखी बातों को जरूर ध्यान रखें।
  1. चाय, कॉफी में शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए। शहद का इनके साथ सेवन विष के समान काम करता है।
  2. अमरूद, गन्ना, अंगूर, खट्टे फलों के साथ शहद अमृत है।
  3. शरीर के लिये आवश्यक, लौह, गन्धक, मैगनीज, पोटेशियम आदि खनिज द्रव शहद में होते हैं।
  4. शहद के एक बड़ा चम्मच में 75 ग्राम कैलोरी शक्ति होती है।
  5. किसी कारणवश आप को शहद सूट नहीं किया तो या खाकर किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो नींबू का सेवन करें।
  6. इसे आग पर कमी न तपायें।
  7. मांस, मछली के साथ शहद का सेवन जहर के समान है।
  8. शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानिकारक है।
  9. बाजरू चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत में विष मिलाने के समान है।
  10. शहद सर्दियों में गुनगुने दूध या पानी में लेना चाहिये।
  11. एक साथ अधिक मात्रा में शहद न लें। ऐसा करना नुकसानदायक होता है। शहद दिन में दो या तीन बार एक चम्मच लें।
  12. घी, तेल, मक्खन में शहद विष के समान है।
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शहद के फायदे और नुकसान
आयुर्वेद में ऐसी मान्यता है कि अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले छत्तों के शहद के गुण वृक्षों के आधार पर होते हैं। जैसे नीम पर लगे शहद का उपयोग आँखों के लिए, जामुन का मधुमेह, सहजने का हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए बेहतर होता है। इसके अलावा भी शहद का सेवन कई रोगों में उपयोगी है।
  • * अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खाँसी में आराम मिलता है।
  • * पके आम के रस में शहद मिलाकर देने से पीलिया में लाभ होता है।
  • * जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
  • * उल्टी (वमन) के समय पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग लाभकारी रहता है।
शहद से नुकसान : अधिक गर्म पानी, गर्म दूध, अधिक धूप में बच्चों को शहद का प्रयोग हानिकारक साबित होता है। साथ ही घी की समान मात्रा प्रयोग करने पर यह विष की भाँति कार्य करने लगता है। इसलिए इन स्थितियों में इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

शहद में छिपा है सेहत का खजाना
 
नई दिल्ली: आयुर्वेद में शहद को एक खाद्य एवं प्राकृतिक औषधि के रूप में निरूपित किया गया है और शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाये रखने के लिये इसे अमृत भी कहा गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, परन्तु सर्दियों में तो शहद का प्रयोग विशेष लाभकारी होता है।
 
नियमित रूप से शहद का सेवन करने से शरीर को स्फूर्ति, शक्ति और ऊर्जा मिलती है। शहद से शरीर स्वस्थ, सुंदर और सुडौल बनता हैं। शहद मोटापा घटाता भी है और शहद मोटापा बढ़ाता भी है। मीठे शहद के गुणों से रोगी व्यक्ति स्वस्थ हो सकता है।
 
शहद औषधीय गुणों की वजह से अनेक बीमारियों में उपयोग होता रहा है। शहद का प्रयोग जहां आंखों की रोशनी बढ़ाने तथा कफ एवं अस्थमा और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर सिद्ध हुआ है, वहीं रक्त शुद्धि तथा दिल को मजबूत करने में भी सहायक है, तो पेश है कुछ टिप्स कि शहद को किन-किन बीमारियों में तथा किन द्रव्यों के साथ अनुपात निर्धारण से हम इसका लाभ उठा सकते हैं।
 
शहद, गाजर के जूस के साथ लेने से आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है। इसे खाना खाने से एक घंटा पहले लेना चाहिये। शहद के औषधीय गुणों के कारण अनेक बीमरियों से छुटाकरा पाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। शहद को खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों को भी शहद से दूर किया जा सकता है।
 
कब्ज को दूर करने के लिए भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है। टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर प्रतिदिन लेने से कब्ज की शिकायत दूर होने लगती है।
 
शहद को पानी में मिलाकर कुल्ले करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। दांत के दर्द को दूर करने में भी शहद मदद करता है। रूई के फाहे को शहद में भिगोकर दर्द वाली जगह पर रखें। चेहरे को झुरिंयां से बचाने के लिए शहद में कच्ची हल्दी पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर लगाने से झुरिंयां दूर हो जाएंगी। गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने से मोटापा कम होता है व दूध में शहद डालकर पीने से दुबलापन मिटता है।
 
गुनगुने दूध में रोजाना एक चम्मच शहद डालकर खाने से शरीर में हमेशा स्फूर्ति बनी रहती है।

शहद के आठ प्रयोग: ये करेंगे जादू सा असर
 
शहद को आयुर्वेद में औषधीय गुणों का खजाना माना गया है। शहद का अलग-अलग तरह से उपयोग कर हम हमारे शरीर की कई सारी समस्याओं को दूर भगा सकते हैं। शहद में यह गुण होता भी है कि इसका अलग-अलग वस्तुओं के साथ उपयोग करने पर इसकी तासीर भी भिन्न हो जाती है।
आइए जानते हैं शहद के ऐसे ही कुछ गुणों को....
  1. शहद को मसूड़ों पर मलने से पायरिया नहीं होता।
  2. छोटे बच्चों को दूध पिलाने से पहले शहद चटा दें। फिर दूध पिलाएं ये रोग निरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  3. बेसन, मलाई में शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें, चेहरा चमक उठेगा ।
  4. प्रतिदिन 25 ग्राम शहद दूध के साथ जरूर लें। इससे शरीर को ताकत मिलती है।
  5. त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा।
  6. रात को सोने से पहले दूध के साथ शहद लेने पर बहुत अच्छी नींद आती है।
  7. दूध में शक्कर की जगह शहद लेने से गैस नहीं बनती और पेट के कीड़े भी निकल जाते हैं।
  8. जुकाम होने पर शहद की भाप लें व उसी पानी से कुल्ला करें।

मीठे शहद के गुणकारी नुस्खे
 
कई बार हम साधारण सी बीमारी में भी घबरा जाते हैं, लेकिन अगर हमें थोड़ा भी घरेलू नुस्खों के बारे में पता हो तो आसानी से तुरंत इलाज किया जा सकता है। दादी-नानी के खजाने से हम लेकर आए हैं ऐसे ही कुछ खास लाजवाब सरल-सहज नुस्खे, जिन्हें अपना कर आप भी पा सकते हैं निरोगी काया :-

  1. * अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
  2. * पके आम के रस में शहद मिलाकर देने से पीलिया में लाभ होता है।
  3. * जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
  4. * उल्टी (वमन) के समय पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग लाभकारी रहता है।
  5. * शुष्क त्वचा पर शहद, दूध की क्रीम व बेसन मिलाकर उबटन करें। इससे त्वचा की शुष्कता दूर होकर लावण्यता प्राप्त होगी। 
  6. * एक गिलास दूध में बिना शकर डाले शहद घोलकर रात को पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर सुडौल, पुष्ट व बलशाली बनता है। 
  7. * शहद नित्य सेवन निर्बल आमाशय व आंतों को बल प्रदान करता है। 
  8. * प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
  9. * हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है। 
  10. * पेट के छोटे-मोटे घाव और शुरुआती स्थिति का अल्सर शहद को दूध या चाय के साथ लेने से ठीक हो सकता है। 
  11. * सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है। 
  12. * शहद से मांसपेशियां बलवती होती हैं। 
  13. * बढ़े हुए रक्तचाप में शहद का सेवन लहसुन के साथ करना लाभप्रद होता है। 
  14. * अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं। 
  15. * संतरों के छिलकों का चूर्ण बनाकर दो चम्मच शहद उसमें फेंटकर उबटन तैयार कर त्वचा पर मलें। इससे त्वचा निखर जाती है और कांतिवान बनती है। 
  16. * कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।

Wednesday, 16 September 2015

दालचीनी(Cinnamon)

भारत में दालचीनी के वृक्ष हिमालय तथा पश्चिमी तट पर पाये जाते हैं। इस वृक्ष की छाल, दालचीनी के नाम से प्रसिद्ध है।

यह रस में तीखी, कड़वी  तथा मधुर होती है। उष्ण-तीक्ष्ण होने के कारण दीपन, पाचन और विशेष रूप से कफ का नाश करने वाली है। यह अपने मधुर रस से पित्त का शमन और उष्णवीर्य होने से वात का शमन करती है। अतः त्रिदोषशामक है।
सावधानीः दालचीनी उष्ण-तीक्ष्ण तथा रक्त का उत्क्लेश करने वाली है अर्थात् रक्त में पित्त की मात्रा बढ़ानेवाली है। इसके अधिक सेवन से शरीर में गरमी उत्पन्न होती है। अतः गरमी के दिनों में इसका लगातार सेवन न करें। इसके अत्यधिक उपयोग से नपुंसकता आती है।
औषधि-प्रयोगः
मुँह के रोगः यह मुख की शुद्धि तथा दुर्गन्ध का नाश करने वाली है। अजीर्ण अथवा ज्वर के कारण गला सूख गया हो तो इसका एक टुकड़ा मुँह में रखने से प्यास बुझती है तथा उत्तम स्वाद उत्पन्न होता है। इससे मसूढ़े भी मजबूत होते हैं।
दंतशूल व दंतकृमिः इसके तेल में भिगोया हुआ रूई का फाहा दाँत के मूल में रखने से दंतशूल तथा दंतकृमियों का नाश होता है। 5 भाग शहद में इसका एक भाग चूर्ण मिलाकर दाँतों पर लगाने से भी दंतशूल में राहत मिलती है।
पेट के रोगः  1 चम्मच शहद के साथ इसका 1.5 ग्राम (एक चने जितनी मात्रा) चूर्ण लेने से पेट का अलसर मिट जाता है।
दालचीनी, इलायची और तेजपत्र को समभाग में लेकर मिश्रण करें। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से पेट के अनेक विकार जैसे मंदाग्नि, अजीर्ण, उदरशूल आदि में राहत मिलती है।
सर्दी, खाँसी, जुकामः दालचीनी का 1 ग्राम चूर्ण एवं 1 ग्राम सितोपलादि चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से सर्दी और खाँसी में तुरंत राहत मिलती है।
क्षयरोग(टी.बी.)- इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से कफ आसानी से छूटने लगता है एवं खाँसी से राहत मिलती है। दालचीनी का यह सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग है।
रक्तविकार एवं हृदयरोगः दालचीनी रक्त की शुद्धि करने वाली है। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करने से अथवा दूध में मिलाकर पीने से रक्त में उपस्थित कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटने लगती है। अथवा इसका आधा से एक ग्राम चूर्ण 200 मि.ली. पानी में धीमी आँच पर उबालें। 100 मि.ली. पानी शेष रहने पर उसे  छानकर पी लें। इससे भी कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटती है।
गर्म प्रकृति वाले लोग पानी व दूध मिश्रित कर इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रयोग से रक्त की शुद्धि होती है एवं हृदय को बल मिलता है।
सामान्य वेदनाः इसका एक चम्मच (छोटा) चूर्ण 20 ग्राम शहद एवं 40 ग्राम पानी में मिलाकर स्थानिक मालिश करने से वात के कारण होने वाले दर्द से कुछ ही मिनटों में छुटकारा मिलता है।


इसका एक ग्राम चूर्ण और 2 चम्मच शहद व 1 कप गुनगुने पानी में मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से संधिशूल में राहत मिलती है।
वेदनायुक्त सूज तथा सिरदर्द में इसका चूर्ण गरण पानी में मिलाकर लेप करें।
बिच्छू के दंशवाली जगह पर इसका तेल लगाने से दर्द कम होता है।
वृद्धावस्थाः बुढ़ापे में रक्तवाहिनियाँ कड़क और रुक्ष होने लगती हैं तथा उनका लचीलापन कम होने लगता है। एक चने जितना दालचीनी का चूर्ण शहद में मिलाकर नियमित सेवन करने से इन लक्षणों से राहत मिलती है। इस प्रयोग से त्वचा पर झुर्रियाँ नहीं पड़तीं, शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है और श्रम से जल्दी थकान नहीं आती।
मोटापाः 1.5 ग्राम चूर्ण का काढ़ा बना लें। उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट तथा सोने से पहले पियें। इससे मेद कम होता है।
त्वचा विकारः दालचीनी का चूर्ण और शहद समभाग में लेकर मिला लें। दाद, खाज तथा खुजलीवाले स्थान पर उसका लेप करने से कुछ ही दिनों में त्वचा के ये विकार मिट जाते हैं।
सोने से पूर्व इसका 1 चम्मच चूर्ण 3 चम्मच शहद में मिलाकर मुँह की कीलों पर अच्छी तरह से मसलें। सुबह चने का आटा अथवा उबटन लगाकर गरम पानी से चेहरा साफ कर लें। इससे कील-मुँहासे मिटते हैं।
बालों का झड़नाः दालचीनी का चूर्ण, शहद और गरम ऑलिव्ह तेल 1-1 चम्मच लेकर मिश्रित करें और उसे बालों की जड़ों में धीरे-धीरे मालिश करें। 5 मिनट के बाद सिर को पानी से धो लें। इस प्रयोग से बालों का झड़ना कम होता है।