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Thursday, 17 September 2015

केसर

परिचय :

केसर की खेती भारत के कश्मीर की घाटी में अधिक की जाती है। यहां की केसर हल्की, पतली, लाल रंग वाली, कमल की तरह सुन्दर गंधयुक्त होती है। असली केसर बहुत महंगी होती है। कश्मीरी मोंगरा सर्वोतम मानी गई है। विदेशों में भी इसकी पैदावार बहुत होती है और भारत में इसकी आयात होती है।
केसर का पौधा बहुवर्षीय होता है और यह 15 से 25 सेमी ऊंचा होता है। इसमें घास की तरह लंबे, पतले व नोकदार पत्ते निकलते हैं। इसमें बैगनी रंग की अकेले या 2 से 3 की संख्या में फूल निकलते हैं। एक फूल से केसर के तीन तन्तु प्राप्त होती है। इसके बीज आयताकार, तीन कोणों वाले होते हैं जिनमें से गोलकार मींगी निकलती है।
आयुर्वेद के अनुसार : आयुर्वेदों के अनुसार केसर उत्तेजक होती है और कामशक्ति को बढ़ाती है। यह मूत्राशय, तिल्ली, यकृत (लीवर), मस्तिष्क व नेत्रों की तकलीफों में भी लाभकारी होती है। प्रदाह को दूर करने का गुण भी इसमें पाया जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार : केसर की रासायनिक बनावट का विश्लेषण करने पर पता चला हैं कि इसमें तेल 1.37 प्रतिशत, आर्द्रता 12 प्रतिशत, पिक्रोसीन नामक तिक्त द्रव्य, शर्करा, मोम, प्रोटीन, भस्म और तीन रंग द्रव्य पाएं जाते हैं। अनेक खाद्य पदार्थो में केसर का उपयोग रंजन पदार्थ के रूप में किया जाता है।
असली केसर की पहचान : असली केसर पानी में पूरी तरह घुल जाती है। केसर को पानी में भिगोकर कपड़े पर रगडने से यदि पीला केसरिया रंग निकले तो उसे असली केसर समझना चाहिए और यदि पहले लाल रंग निकले व बाद में पीला पड़े तो नकली केसर समझना चाहिए।
केसर बुखार की प्रारिम्भक अवस्था, दाने, चेचक आन्त्रज्वर को बाहर निकालता है लेकिन दाने निकल आने पर विशेषत: बुखार आदि पित्त के लक्षणों में केसर का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।
विभिन्न भाषाओं में केसर के नाम :

हिन्दी केशर, केसर।
अंग्रेजी सैफ्राम।
संस्कृत कुंकुभ, घुसृण, रक्त काश्मीर।
मराठी केशर।
गुजराती केशर।
बंगाली कुकम।
तैलगी कुकुम पुवु।
फारसी करकीमास।
अरबी जाफरान।
लैटिन क्रोकस सेटाइवस।