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Wednesday, 16 September 2015

तक्र (छाछ)

दूध में जोरन (थोड़ा दही) डालने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़ने लगते हैं और वह दूध 4-5 घंटों में ही जमकर दही बन जाता है। दही में पानी डालकर मथने पर मक्खन अलग करने से वह छाछ बनता है। छाछ न ज्यादा पतली होती होन ज्यादा गाढ़ी। ऐसी छाछ दही से ज्यादा गुणकारी होती है। यह रस में मधुर, खट्टी-कसैली होती है और गुण में हलकी, गरम तथा ग्राही होती है।
छाछ अपने गरम गुणों, कसैलीमधुर, और पचने में हलकी होने के कारण कफनाशक और वातनाशक होती है। पचने के बाद इसका विपाक मधुर होने से पित्तप्रकोप नहीं करती।
भोजनान्ते पिबेत् तक्रं वैद्यस्य किं प्रयोजनम्।
भोजन के उपरान्त छाछ पीने पर वैद्य की क्या आवश्यकता है?
छाछ भूख बढ़ाती है और पाचन शक्ति ठीक करती है। यह शरीर और हृदय को बल देने वाली तथा तृप्तिकर है। कफरोगवायुविकृति एवं अग्निमांद्य में इसका सेवन हितकर है। वातजन्य विकारों में छाछ में पीपर (पिप्ली चूर्ण) व सेंधा नमक मिलाकर कफ-विकृति में अजवायनसोंठ, काली मिर्च, पीपर व सेंधा नमक मिलाकर तथा पित्तज विकारों में जीरा व मिश्री मिलाकर छाछ का सेवन करना लाभदायी है। संग्रहणी व अर्श में सोंठकाली मिर्च और पीपर समभाग लेकर बनाये गये 1 ग्राम चूर्ण को 200 मि.ली. छाछ के साथ लें।
सावधानीः मूर्च्छा, भ्रमदाह, रक्तपित्त व उरःक्षत (छाती का घाव या पीड़ा) विकारों में छाछ का प्रयोग नहीं करना चाहिए। गर्मियों में छाछ नहीं पीनी चाहिए। यदि पीनी हो तो अजवायनजीरा और मिश्री डालकर पियें।

 

जामुन(jambul)

जामुन अग्निप्रदीपक, पाचक, स्तंभक (रोकनेवाला) तथा वर्षा ऋतु में अनेक रोगों में उपयोगी है। जामुन में लौह तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होता है, अतः पीलिया के रोगियों के लिए जामुन का सेवन हितकारी है। जामुन यकृत, तिल्ली और रक्त की अशुद्धि को दूर करते हैं। जामुन खाने से रक्त शुद्ध तथा लालिमायुक्त बनता है। जामुन मधुमेह, पथरी, अतिसार, पेचिश, संग्रहणी, यकृत के रोगों और रक्तजन्य विकारों को दूर करता है। मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन के बीज का चूर्ण सर्वोत्तम है।
सावधानीः जामुन सदा भोजन के बाद ही खाना चाहिए। भूखे पेट जामुन बिल्कुल न खायें। जामुन खाने के तत्काल बाद दूध न पियें।
जामुन वातदोष नाश करने वाले हैं अतः वायुप्रकृतिवालों तथा वातरोग से पीड़ित व्यक्तियों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए। शरीर पर सूजन व उलटी दीर्घकालीन उपवास करने वाले तथा नवप्रसूताओं को इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
जामुन पर नमक लगाकर ही खायें। अधिक जामुन का सेवन करने पर छाछ में नमक डाल कर पियें।
औषधि-प्रयोगः
मधुमेहः मधुमेह के रोगी को नित्य जामुन खाने चाहिए। अच्छे पके जामुन सुखाकर, बारीक कूटकर बनाया गया चूर्ण प्रतिदिन 1-1 चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
प्रदररोगः कुछ दिनों तक जामुन के वृक्ष की छाल के काढ़े में शहद (मधु) मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से स्त्रियों का प्रदर रोग मिटता है।
मुँहासेः जामुन के बीज को पानी में घिसकर मुँह पर लगाने से मुँहासे मिटते हैं।
आवाज बैठनाः जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना लें। 2-2 गोली नित्य 4 बार चूसें। इससे बैठा गला खुल जाता है। आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है। अधिक बोलने वालों के लिए यह विशेष चमत्कारी योग है।

स्वप्नदोषः जामुन की गुठली का 4-5 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है।

दस्तः जामुन के पेड़ की पत्तियाँ (न ज्यादा पकी हुईं न ज्यादा मुलायम) लेकर पीस लें। उसमें जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर उसकी गोलियाँ बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से कैसे भी तेज दस्त हों, बंद हो जाते हैं।

अन्य गुण

  1. जामुन के पेड़ की छाल और पत्तियां रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर होती हैं।
  2. जामुन का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं।
  3. हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और अर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है।
  4. जामुन का जूस पाचनशक्ति को बेहतर करने में सहायक होता है।
  5. अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है।
  6. पाचनशक्ति मजबूत करने में जामुन काफी लाभकारी होता है।
  7. यकृत (लिवर) से जुड़ी बीमारियों के बचाव में जामुन रामबाण साबित होता है।
  8. जमुन को मधुमेह के बेहतर उपचार के तौर पर जाना जाता है।